Sunday, April 26, 2015

हम होंगे फिर से एक साथ


हम होंगे फिर से एक साथ

एक दिन जरूर आएगा
जब गम के बादल छँट जाएंगें
तम के मौसम कट जायेंगे
विश्वास का सूरज उभरेगा
दूर क्षितिज पर किसी प्रभात
हम होंगे फिर से एक साथ.

एक दिन जरूर आएगा
जब प्रेम से होंगे प्रदीप्त
हमारे रास्तें, हमारी दिशायें,
कल भले हम रहें, ना रहें
धरा पर रहेगी हमारी कथायें.

वह दिन जरूर आएगा
जब रिश्तें तोले नहीं, जीये जाएंगें
सत्य में,  सुंदर में,  चिरंतन में,
भावनायें  कुचली नहीं, उगाई जायेगी
अनुभूतियों के विराट उर्वर चमन में.

मेरे मित्र,
उसी गरिमामय प्रभात की प्रतिक्षा में
मैं आता रहूँगा बदल कर रूप
कहीं बनके छाया तो कहीं धूप
कभी प्रतिस्पर्धी, कभी प्रतिरूप

मैं उडूंगा दूर तक तुम्हारी उड़ानों में
शिखरों पर, साहिलों और मैदानों में
और हम देखेंगें साथ साथ
हम जानेंगें साथ साथ, कि
क्या फर्क होता है बस्ती में, वीरानों में
क्या अंतर है आकाश में, तहखानो में
हम खोजेंगे यह सृजन सत्य
कि क्यों नियंता ने हमको अधूरा बनाया,
किसी की तलाश में जगत को बसाया.
किसतरह शब्दों में बह उठी भावधारा
किसतरह मृत्यु को जिंदगी ने संवारा
कैसे जकड़न में धोखा है विसर्जन का
कैसे सृजन सहोदर है परिवर्तन का


मेरे मित्र, वह दिन जरूर आएगा
जब हम
किसी नदी के उद्गम पर बिछड़ेंगे
और अनगिनत लहरों पर
अनगिनत नावों में भटकते
उसके मुहाने पर फिर मिलेंगें

शायद उस दिन अवश्य
उसकी विराट और उत्ताल तरंगों में
साथ साथ डूबते उतराते
हमारे चेहरे, सदियों से बिछड़े
जाने पहचाने अपनेपन
और विश्वास से खिलेंगे.

दिनेश शर्मा
 

गाँधी नाम की दुकान

इस देश में गाँधी नाम के प्रमाणपत्र बाँटने का ठेका केवल गिने चुने खानदानों या उनके लाभार्थियों ने लेकर रखा है. इन लोगों को लेफ्ट से कोई समस्य...