मैं एक वकील और सामाजिक अध्येता के रूप में चकित हूँ, चिंतित हूँ और
भयभीत हूँ. यदि कोई सफलता के शिखर पर बैठा खूबसूरत व्यक्ति किसी महिला के साथ
दुर्व्यवहार करें तो उसका फँसना, जनता के सामने अपमानित होना और सामाजिक जीवन से
कुछ काल के लिए बहिष्कृत होना लाजमी है. कोई उच्च पद पर विराजमान व्यक्ति अपनी
सत्ता और शक्ति के मद में किसी महिला का शोषण करें, तो उस पर भी समाज और मिडिया को
आक्रोशित होने का हक है. किंतु बेचारे कुमार विश्वास को किस बात की सजा दी जा रही
है?
कुछ समय पहले कुमार विश्वास के विरोधियों ने एक महिला कार्यकर्ता
के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर सोशल मिडिया पर रसीले आरोप लगाये और ट्विटर पर
उन्हें बदनाम और अपमानित करने की हरसंभव कोशिशें की. उनके साथ उस महिला के एक फोटो को विशेष रूप से
चिन्हांकित करके सोशल मिडिया पर पेश किया गया और नीचे बेहद निंदनीय बातें प्रकाशित
की गयी. कुमार विश्वास ने ट्विटर पर आक्रोशपूर्ण ढंग से अपना बचाव भी किया. यदि
उसी समय देश के कानून के अनुरूप कार्यवाही की जाती तो जिन लोगों ने ये अपमानजनक
फोटो और संदेश सोशल मिडिया पर अपलोड किये थे, उन्हें तत्काल पकड़ा जा सकता था.
किंतु देश का महिला आयोग और पुलिस महकमा ऐसे पेश आया, मानो यह कोई दखल लेने लायक
मामला था ही नहीं.
आज अचानक यह मुद्दा और भी भद्दे ढंग से देश के सामने आ गया. उस महिला
के पति ने अपनी पत्नी पर अविश्वास जताते हुए उसे घर से बाहर निकाल दिया है. और वह महिला इसका दोषी, उन तस्वीरों को सोशल
मिडिया पर अपलोड करनेवालों को नहीं बल्कि कुमार और उनकी पत्नि को मान रही है. उसका
आरोप है कि उन्होंने समय रहते पर्याप्त मात्रा में सफाई नहीं दी, इसलिए उसका जीवन
उध्वस्त हो गया है. उस महिला का कहीं यह कहना नहीं है कि कुमार ने कभी उसके साथ
कोई लैंगिक दुर्व्यवहार किया है, या उसक शारीरिक शोषण किया है, बल्कि उसका भी यही
कहना है कि कुमार के उसके साथ अवैध संबंध नहीं थे. एक हिसाब से वह कुमार को आज
तक उनके विरोधियों द्वारा डाले जा रहें कीचड़ से पाक साफ़ कर रही है. किंतु जिस
अंदाज में देश का इलेक्ट्रॉनिक मिडिया इस मसले को कुमार के विरूद्ध प्रयुक्त कर
रहा है, वह बेहद शर्मनाक, दिल दहला देनेवाला और हमारी आपकी सभी की इज्जत और
प्रतिमा को कुछ पत्रकारों की सनक और लालच का शिकार बना देनेवाला है.
क्या कोई अपराध नहीं करना, कुमार का अपराध है? क्या अपने विरोधियों के
गैरजिम्मेदाराना आरोपों पर जोर शोर से पर्याप्त सफाई नहीं देना कोई नैतिक अपराध है?
क्या अपनी बेगुनाही का डिंडोरा नहीं पीटना भी अब अपराध है? और सबसे बड़ी बात, क्या
अनर्गल आरोप लगाने वाले अब बेगुनाह माने जायेंगे और और नैतिक अपराध के मामलों में सफाई
पेश नही करने वाले अपराधी माने जायेंगे? सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह देखना होगा कि
देश का महिला आयोग कुमार विश्वास के खिलाफ किस बात की जाँच करेगा? वह सोशल मिडिया
पर महिला को बदनाम करने वालों की कालर पकड़ेगा या कुमार को अपनी सत्ता का रुतबा
दिखाएगा.
मुझे ज्यादा चिंता कुमार की पत्नी की गरिमा को लेकर है. जब उसके पति
ने कोई अपराध ही नहीं किया है, यह बात वह महिला कार्यकर्ता ही टीवी के कैमरों के
सामने बार बार कह रही है तो कुमार की पत्नी किस बात की सफाई दे और किसे सफाई दे. क्या
अपने नितांत निजी जीवन को निजी बनाये रखना उसका मानवीय अधिकार नहीं है? खेद की बात
यह है कि आरोप लगाने वाली वह महिला भी असली अपराधियों को पकड़ने के बजाय, उस महिला
से सफाई मांग रही है, जो वास्तव में इस पूरे मसले में एकमेव पीड़ित व्यक्ति है. यदि
कुमार ने कोई दुष्कर्म किया है तो भी वही पीड़ित है, और नहीं किया है तो भी मुफ़्त
में समाज और नाते-रिश्तेदारों में बदनाम होने के कारण वही पीड़ित है. क्या कोई उसकी
व्यथा को सुनकर असली अपराधियों तक पहुँचने का कष्ट उठायेगा?
एक ऐसे दौर में जब मिडिया कुछ व्यावसायिक घरानों के समस्त वैध और अवैध
धंधों का पहरेदार हो चुका हो, जब कैमरे के जादूगर अपनी कला बाजार की ताकतों के
हाथों लगभग बेच चुके हो, जब हमारे विचारों
को भी हर रोज उनके अपने मतलब के अर्थ निकलाने के लिए भरमाया जा रहा हो, जब कोई
अपराध नहीं करनेवाले परिवार को निंदा और सार्वजनिक चर्चा के लिए चौरस्ते पर खींचा
जा रहा हो, जब महिला आयोग असली गुनहगारों तक पहुंचने के बजाय इस पगड़ी उछालने के
कारोबार में रेफरी बन रहा हो और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया तथ्यों को बेहद शर्मनाक अंदाज
में पेश कर रहा हो, इस देश में आगामी दशक का सबसे सफल व्यापार बदनामी करके पैसे वसुलना
हो जाये तो किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
खेद सिर्फ इतना होगा कि कल तक इन्हें घटिया अपराधी मानकर सजा दी जाती थी, अब बहादुर पत्रकार मानकर उन्हें पुरुस्कृत किया जायेगा. ऐसे दौर में कौन पीड़ित,
शोषित और कौन अपराधी है, इसका फैसला बेहद मुश्किल होने जा
रहा है. मुझे दुःख है कि मेरा बेटा जिस दौर में अपने सपनों की दुनिया में कदम
रखेगा, तब तक यह देश और भी भद्दा, बेईमान और षड्यंत्रकारी हो चुका होगा. जिन्हें खड़ा करने में पालकों की पूरी उम्र लग जायेगी, उन्हें उध्वस्त करने में, मिडिया केवल चंद सेकंड लेगा. बिना किसी क्षतिपूर्ति के भय के लोगों की जिंदगी और अस्मिता से खेलना अगर आय.पी.एल की तरह लाइव टेलीकास्ट होनेवाला लाभदायक व्यापार बन गया तो, इस देश को भगवान भी नहीं बचा पायेगा.
मैं इसका निषेध करने के लिए एक कदम उठा रहा हूँ.. मैं आज से एक महीने
के लिए ऐसे सभी हिंदी न्यूज चैनल्स देखना बंद कर रहा हूँ. मैं आज से माय मराठी के
बेहद गरिमा से भरे सुसंस्कृत समाचार चैनल्स देखूँगा. रोज दिल्ली की गंदगी देखकर
अपने आपको पीड़ित करने से बेहतर है एक महीने के लिए मराठी की मस्ती, प्रतिभा और
सादगी का दीदार किया जाये.. इन धनेश्वरों
की घटिया दुनिया से कहीं दूर जमीन से जुड़े ज्ञानेश्वरों के दर्शन लिए जाये.
दिनेश शर्मा
